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Sunday, 3 September 2017

मुतने के लिए उठी भाभी को चोद लिया


मेरा नाम युग हे और मैं भरूच गुजरात का रहने वाला हूँ. मैं गुजरात के दहज की एक मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करता हूँ. मैं काफी समय से फ्री हिंदी सेक्स स्टोरीस पढता आया हूँ. अच्छा लगता हे जब लो अपने अनुभव लोगों से बांटते हे. और मैंने सोचा की मैं भी अपने अनुभव को लिख के भेजूं. मैं ऑलमोस्ट 6 फिट का हूँ और मेरा लंड 6 इंच का हे. मैं किसी भी औरत को संतोष दे सकता हूँ. मैं आज आप को जो कहानी बताने के लिए आया हूँ वो मेरे भाभी को चोदने की हे.

मेरे मामा वलसाड के पास धरमपुर में रहते हे. धरमपुर में मेंगो का बड़ा मार्किट हे और बड़े बड़े फ़ार्म में अच्छी किस्म की मेंगो फार्मिंग होती हे. मेरे मामा का बिजनेश भी उसी का हे और मेरे मामा का बेटा हे वो ही सब काम देखता हे. मेरी भाभी दिखने में बहुत ही अच्छी हे. वो सेम टू सेम दीपिका पादुकोण के जैसी ही लगती हे. मेरी और भाभी की अच्छी बनती हे. जब मैं वहां पहुंचा तो मैं घर में फ्रेश हो के मेरे मामा के दुकान पर पहुंचा. वहाँ सब बीजी थे काम में. मैं वही भाई के साथ बैठ के सब कुछ हिसाब किताब देखने लगा. ये सब करते करते वही पर रात के 11 बज गए.


मैं और मेरा भाई सब कुछ काम निपटा के घर गए. भाभी और मेरी वाइफ बैठ के बातें कर रहे थे. उन्होंने हमें खाना परोसा. खाने के बाद भाई बोला की मैं सामने अपने घर में सोने के लिए जाता हूँ. मेरे भाई और भाभी वैसे तो मामा मामी के साथ रहते थे. पर उनका अपना खुद का अलग मकान भी था जो मामा के घर के सामने ही था. भाई और भाभी दोनों वही पर सोने के लिए जाते हे, बाकि पूरा दिन वो लोग मामा के घर में ही रहते हे.

भाई बोला की मैं सोने के लिए जा रहा हूँ आप लोग बैठ के बातें करो. वो पुरे दिन दिकान का काम देख कर थक जाता हे तो सो गए. मैं मेरी वाइफ और मेरी भाभी अभी भी बैठ के बातें कर रहे थे. 1 बज गया तो हम सब सोने के लिए अपने अपने रूम में गए. फिर रात के शायद 2 – 2:30 बजे मैं पेशाब करने के लिए गया. मैंने देखा की तब टॉयलेट के अंदर कोई था. मैं बहार ही खड़ा रहा.

फिर थोड़ी देर में अन्दर से भाभी निकली. मैं समझ गया की वो सोने के लिए यही रुक गई थी लेट होने की वजह से. अभी तक मेरा कोई ऐसा वैसा गन्दा इरादा नहीं था भाभी को ले के. लेकिन तब भाभी नाईट स्यूट पहन के संडास से निकली थी. और वो उसके अन्दर इतनी सेक्सी लग रही थी की मैं उसे देखता ही रह गया. पता नहीं मेरे दिमाग में उस समय क्या चल गया की मैंने भाभी को पकड ही लिया. मेरा लंड आधे मिनिट से भी कम समय में मुतने से चोदने के मोड़ पर आ गया था. वो बोली, छोड़ दो क्या कर रहे हो युग?

मैंने कहा छोड़ने के लिए थोड़ी पकड़ा हे आप को!

भाभी एकदम घबराई हुई सी लग रही थी और मेरा हाथ छुड़ाना चाहती थी. लेकिन मैंने भी जोर से पकड रखा था इसलिए वो छुड़ा नहीं सकी. फिर मैंने उन्हें कमरे से पकड़ कर मेरी तरफ खिंच लिया वो वो जरा सा और जोर दिखने लगी. मैं बोला देखो ज्यादा उछल कूद मर करो. और मैंने कहा भाभी मुझे कुछ और नहीं करना हे, बस आप अपने होंठो से एक प्यार भरी चुम्मी दे दो तो मैं सो जाऊँगा लंड को हिला के.

वो बोली, ये क्या बोल रहे हो?

मैंने कहा मैं जो कहा वो सच हे. और फिर मैं जबरन भाभी के होंठो को चूमने लगा. भाभी काफी टाइम मना कर रही थी और वो मेरे सकंजे से छूटने की भी कोशिश में लगी थी. मैं भाभी के मम्मे भी मसल रहा था. और उन्हें किस भी दे रहा था. थोड़ी देर में भाभी भी गर्मी महसूस कर के मुझे साथ देने लगी थी. और अब उसके मुहं से मोअनिंग की आवाज आने लगी थी. फिर तो मुझे और भी जोश चढ़ गया. और मैं अन्दर से गुड फिल करने लगा था. मैं भाभी का हाथ पकड़ के उसे रसोईघर में ले गया. वहां पर थोड़ी टफ था क्यूंकि कोई मुतने के लिए आता तो हमारी बात पकड़ी जाती.

किचन के अन्दर वो भी पूरी तरह से खिली हुई थी. और भाभी ने मेरे हाल्फ पेंट को निकाल दिया और वो मेरे लोडे को चड्डी के ऊपर ऊपर से ही दबा के सहलाने लगी. मैं भी उनके नाईट स्यूट को उतार के उनकी पेंटी को देखने लगा. अन्दर भाभी ने कोई ब्रा नहीं पहनी थी. नाईट स्यूट के निचे बस ये पेंटी ही थी.

मैंने भाभी को मेरा लोडा मुहं में ले के चूसने को कहा तो उसने मना कर दिया. लेकिन मैंने उसके मुहं को पकड़ के उसे जबरदस्ती से निचे बिठा दिया. और एक हाथ से उसके मुहं को दबा के लौड़े को मुहं में भर दिया. अब भाभी भी मेरे लंड को चूस रही थी. कुछ देर लोडा चुसाने के बाद मैंने भाभी को किचन के प्लेटफोर्म के ऊपर चढ़ा के उसकी पेंटी निकाल फेंकी. अब मेरा मुहं भाभी की रसीली भोसड़ी के ऊपर था. मैं उस देसी भोसड़ी से निकलते हुए पानी को चाटने लगा था. भाभी की बुर से मूत ककी स्मेल आ रही थी. भाभी मचल रही थी और उसके बदन में एंठन भी आने लगी थी. वो मेरे माथे को पकड के जोर जोर से बुर के ऊपर दबा रही थी. और मैंने भी उसकी बुर के अन्दर अपनी पूरी जबान डाल दी थी.

फिर वो मुझे बोली, चलो अब जल्दी से जो करना हे कर लो. कोई आ गया तो प्रॉब्लम होगी. भाभी की बात सही थी रिस्की ही था उसे ऐसे चोदना. मैंने प्लेटफोर्म के ऊपर ही भाभी की टांगो को खोला. भाभी की भोसड़ी का मुहं खुला हुआ था और वो जैसे मेरा लंड ही मांग रही थी. मैंने अपने लंड को उसके माथे पर रखा और एक झटका लगा दिया. मेरा लंड भाभी की बुर में एकदम आराम से घुस गया. लेकिन उसे दर्द काफी हुआ और उसने अपने होंठो को दांतों तले दबा लिया!

भाभी ने अब मुझे फुसफुसा के कहा 2 महीने से कुछ अन्दर नहीं गया हे इसलिए थोडा टाईट हे, आराम से चोदना प्लीज़. मैंने उसके मुहं को अपने होंठो से बंद कर दिया. और मैं उसे मजे से हिल हिल के चोदने लगा. भाभी को भी खूब मजा आ रहा था मेरा मोटा और कडक लंड ले के. वो भी चूतड़ हिला हिला के चुदवा रही थी और उसके मुहं से मस्त मोअनिंग की आवाज आ रही थी.

मेरा निकलने को था तो मैंने कहा कहाँ निकालू. वो बोली जिसके लिए इतनी महनत की उसके लिए ही पूछते हो, पानी अंदर निकले तभी तो औरत को मजा आता हे. मैंने अपने सब माल को भाभी की बुर में छोड़ दिया. फिर मैंने फटाक से लंड को उसकी चूत से निकाला तो वो कराह उठी. मैंने निचे बैठ के भाभी की चूत को मजे से चाट लिया. चाट चाट के मैंने पूरी बुर को साफ़ कर दिया.

दोस्तों फिर वो नाईट स्यूट पहन के अपनी गांड हिलाते हुए वहां से चली गई. मेरा मन तो बहुत था की उसको कहूँ की रुक जाओ भाभी अभी और लेने दो अपनी भोसड़ी को. लेकिन मैं कुछ कह नहीं सका. मैं तभी जानता था की आज के बाद मुझे शायद ही भाभी को फिर से चोदने को मिलेगा!
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