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Wednesday, 6 September 2017

पड़ोस वाली आंटी की चुदाई


हेलो आल भाभी, गर्ल और हॉट आंटी. आई एम् पीयूष, २३ इयर्स ओल्ड फ्रॉम नागपुर. मैं अपनी लाइफ की सबसे फर्स्ट सेक्स दास्ताँ लिखने जा रहा हु. जिसमे मैंने मेरे पड़ोस की आंटी को चोदा. आई एम् ग्रेट फेन ऑफ़ थिस वेबसाइट एंड ग्रेट फेन ऑफ़ मेरिड लेडिज टू. आज मैं जो कहानी शेयर करने जा रहा हु, ये एक रियल स्टोरी है. जो मेरे और मेरे पड़ोस की एक आंटी के बीच हुई थी. मुझे ९थ क्लास से ही मुठ मारने की आदत है और उसकी वजह से मेरे लंड का साइज़ भी बड़ा है. ७ इंच इन साइज़ और चौड़ा भी है. मैंने मेरे घर के आजू – बाजू वाली भाभी और सेक्सी आंटी को इमेजिन करके मुठ मारता थ. लेकिन. इस आंटी ने मुझे चुदाई का चस्का लगा दिया और थैंक तो आंटी, जिनकी वजह से मुझे सेक्स के बारे में बहुत जानकारी मिली और अब मैं किसी को भी सेटइसफाई कर सकता हु. ये मेरा फर्स्ट सेक्स एक्सपीरियंस है.

अब सीधे स्टोरी पर आते है. सो कहानी कुछ दिन पहले की है, जब मैं घर गया था दिवाली की छुट्टियों में. हमारे घर के बाजू में एक फॅमिली किराये पर रहने आई थी. उनमे टोटल ४ मेम्बर थे. अंकल, आंटी और दो बेटे. आंटी की उम्र करीब ३२ इयर थी और अंकल की ४०. आंटी दिखने में एकदम मस्त माल थी. ५ फिट ४ इंच हाइट आंटी का नाम मीना (नाम चेंज) था. भरे हुए स्थूल बूब्स और सेक्सी गांड देख कर ही चोदने का जी करता है. तो जब मैं घर पंहुचा और दुसरे दिन सबरे फ़ोन पर दोस्त के साथ बात कर रहा था, तब सेक्सी आंटी के दर्शन हुए. तबसे मैं उनको देखने के बहाने ढूंढने लगा था. अंकल शॉप के जाने के बाद, आंटी कभी – कभी बाहर डोर के पास बैठती थी. मैंने हमेशा कुछ ना कुछ बहाना करके उनको देखने जाता. उनके बूब्स और गांड को देखता और कभी – कभी सामने अपने लंड को हाथ लगा देता था और सेट करता था. आंटी भी कभी – कभी तिरछी नजरो से देख लेती थी और शायद उनको पता चल गया था, कि मेरी निगाहे कहाँ रहती थी.


एक दिन वो झाड़ू मार रही थी और मैं दोस्तों के साथ मोबाइल पर बात कर रहा था. तब झाड़ू मारने के लिए झुंकने के बाद, उनके क्लीवेज दिखने लगा. क्या सेक्सी दिख रही थी आंटी साड़ी में, एकदम सेक्सी. जी करता था, कि जाके अभी चोद दू. लेकिन, मैंने कण्ट्रोल किया. लेकिन मेरा लंड आंटी को सलामी दे रहा था. ये देख कर एकदम ४४० वाट का झटका लगा और मैं आंटी के बूब्स को घूरने लगा. मैं आंटी के बूब्स को घूरते हुए, अपने लंड पर हाथ फेर रहा था. मेरा घर एक छोटी सी गली में है और वहां कोई खास लोग आते – जाते भी नहीं है. उन्होंने मुझे ये सब करते हुए देख दिया और मेरे लंड का उभार भी भांप लिया. वो गुस्से में वहां से चली गयी. अगले दिन, सुबह मैं क्रिकेट खेल रहा था, तो आंटी के घर में बॉल चले गया. मैं बॉल लेने गया, तो आंटी जस्ट नहाकर से निकली थी. उनके बाल खुले हुए थे और गीला बदन. बहुत ही सेक्सी लग रही थी. तब मैं पागल हो गया और उन्हें घूरने लगा. वो देख कर मुझमे हिम्मत आ गयी, मैंने सीधा आंटी के पास जाकर, उन्हें दोबोच लिया और हिम्मत करके आंटी को पीछे से पकड़ लिया.


तब आंटी बहुत गुस्सा हुई और मुझे घर से निकाल दिया और बोली – घर पर बता दूंगी. मैं डर गया और वहां से निकल गया. ४-५ दिन मैंने कुछ नहीं किया और दिन भी ऐसे ही बीत गए. फिर एक दिन, आंटी मेरे घर आई और घर पर मम्मी को बोली, कि उन्हें कुछ सामान शिफ्ट करना है, तो मुझे उनके घर भेज दे. तो मम्मी ने हाँ कह दिया और मुझे उनके घर भेज दिया. मैं बहुत ही खुश था. तो मैं घर गया, तो वहां आंटी के अलावा कोई नहीं था. आंटी ने साड़ी नेवल के नीचे पहनी हुई थी और महरून साड़ी में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैंने पूछा, सब कहा है? तो आंटी ने बताया, कि अंकल बाहर गाँव गये है और उनके बच्चे उनके मामा के यहाँ गये हुए है. सो मैंने सोचा, मौका अच्छा है, फायदा उठा लेते है. लेकिन, मेरी फट भी रही थी. मैं कुछ करू और आंटी घर पर मेरी शिकायत ना कर दे. इसलिए मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. मैंने आंटी के साथ मिलकर सामान को इधर – उधर हटाना शुरू किया.

सामान हटाने में मद्दत कर रहा था, कि सडनली आंटी का पल्लू नीचे गिर गया और उनकी क्लीवेज दिखने लगी. मैं उनकी क्लीवेज को घुर रहा था. आंटी ने मुझे उनके बूब्स को घूरते हुए पकड़ लिया. मुझे कहा – क्या देख रहे हो? मैंने कोई जवाब नहीं दिया. उस टाइम आंटी के बूब्स ब्लाउज में से बाहर आने को बेताब थे. फिर आंटी ने कहा:

आंटी – मुझे पता है, कि तुम क्या देख रहे हो?

मैं – क्या, आंटी?


आंटी – चूसोगे क्या?

ये सुनकर मैं एकदम से पागल हो गया. मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया था. मैं एकदम से आंटी की तरफ गया और उनके बूब्स चूसने लगा. फिर आंटी ने कहा – रुको, पहले डोर बंद करके आओ. मैंने भागते हुए डोर बंद करने गया और वापस आ गया. तब तक आंटी ने साड़ी निकाल दी थी. अब आंटी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी. उन्होंने अन्दर से ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी. लग रहा था, कि उन्होंने पहले से ही मूड बनाया हुआ था चुदाई का. मैं उनके बूब्स चूस रहा था और एक बूब चूस रहा था और दूसरा दबा रहा था. बूब्स बहुत ही मुलायम थे. मैं बूब्स चूसता रहा और आंटी सिस्कारिया लेती रही. मैं बीच – बीच में निप्पल को काट भी लेता था.

आंटी एकदम से पागल हो रही थी. फिर मैंने आंटी के ब्लाउज को खोल दिया और उनके बड़े बूब्स को आजाद कर दिया. फिर मैंने उनके पेटीकोट को खिसका दिया. फिर मैंने आंटी को अपनी गोदी में उठाकर बेड पर पटक दिया और ऊपर से ही उनकी चूत लिक करने लगा. आंटी एकदम पागल हो गयी थी और अब वो मेरा सिर अपनी चूत में दबा रही थी और जोर – जोर से सिस्कारिया ले रही थी उम्म्म्मम्म… हम्म्म्म… अहः अहहाह अहहः अहः अहहाह हाहाह अहहाह अहहः उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म. आंटी की सिस्कारिया पुरे रूम में गूंज रही थी और मैं जोश में आ रहा था. फिर आंटी की पेंटी निकलके उनकी चूत को आजाद कर दिया और अपनी ऊँगली उनकी चूत में डाल कर फिन्गेरिंग करने लगा. उनकी मोअनिंग की आवाज़ बड रही थी और पुरे रूम में अगागाग आहाह्हा अहह्हः अहाहा अहः ऊम्म्म्म उम्म्म्म ह्म्म्म आआम्म ऊऊ ऊऊ ओऊ ऊऊ ऊऊ अआमामा आआ एस एस एस की आवाज़े आ रही थी. अब आंटी मेरा नाम लेकर चिल्ला रही थी. पीयूष और चुसो.. जोर से .. जल्दी चुसो.. अहः हाहाहा जम्म्म्म ह्म्म्म उम् उम्म्म उम्म्म उम्म्म म्मम्म मम्म. मैं बहुत प्यासी हु. मेरी प्यास बुझा दो. अहः हाहाहा ऊऊ म्मम्म मम्म हम्म हम्म्म्म म्मम्म उम्म्मम्म… उसके बाद, मैं उनका पूरा बदन चाटने लगा.

उनकी नेवल में जीभ डालकर पूरा चूसने लगा. इतना मज़ा, मुझे लाइफ में पहले कभी नहीं आया था. आंटी की आवाज़ मुझे फुल जोश में ला रही थी. आंटी के पुरे बदन में, मैं जीभ फेरने लगा और वो भी जोश में आ गयी थी. फिर उन्होंने मेरा अंडरवियर निकाल कर मेरे लंड से खेलना शुरू कर दिया. फिर वो उसे अपने मुह में डालकर चूसने लगी. मेरा लंड एकदम सलामी देने लगा. आंटी उसे लोलीपोप की तरह चूस रही थी और लगभग ५ मिनट चूसने के बाद, आंटी उसका पूरा रस पी गयी. अब उनके नरम – नरम होठो की बारी थी. उनके होठ बड़े रसीले थे. ५ मिनट होठ चूसने के बाद, आंटी बोली – अब इतना तड़पा मत. जल्दी से मेरी आग ठंडी कर और १५ – २० मिनट के फॉरप्ले के बाद, आंटी की चूत की बारी थी. आंटी ने मेरा लंड फिरसे चूसा और उसे चुदाई के लिए एकदम तैयार कर दिया. मैं नया था, इसलिए कॉंफिडेंट नहीं था. लेकिन ब्लूफिल्म देखने के बाद, नॉलेज काफी थी. फिर आंटी की चूत में मेरा गरम – गरम रॉड डाल दी और थोड़ा फ़ोर्स लगाकर अन्दर कर दिया.

आंटी की चूत थोड़ी कसी हुई थी और जब मेरा लंड अन्दर गया, तो ऐसा लग रहा था, कि साल भर से आंटी की दमदार चुदाई नहीं हुई है. फिर मैंने और जोर से झटके मारे और पूरा लंड अन्दर चले गया और जैसे कि मेरा फर्स्ट टाइम था, तो मैं थोड़ा जल्दी झड़ गया. फिर आंटी ने मेरा लंड बाहर निकालने को बोला और पूरा साफ़ करके चूसने लगी और मेरा वीर्य क्रीम की तरह चाट लिया. मैं अब तक दो बार झड़ चूका था और आंटी ने लंड चूस कर फिर से तैयार कर दिया और ५ मिनट के बाद मेरा लौड़ा फिर से तैयार था आंटी की चुदाई करने के लिए. मैंने लंड को आंटी की चूत में डाल दिया और जोर – जोर से चिल्ला रही थी… अहहाह अहहः अहाहः हाहाहा आआ हम्म्म्म एस एस एस एस हम्म्म्म ऊऊओ अहहाह अहहाह ओऊ हाहा.. बुझा तेरी आंटी की प्यास बुझा दे.. मिटा दे मेरी खुजली.. बहुत ज्यादा खुजली है इस चूत में.. आंटी की आवाज़े सुनकर मैं जोश में आ गया और जोर – जोर से चोदने लगा और कम से कम १५ मिनट चुदाई के बाद, आंटी छुट गयी और गरम – गरम पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया. मैंने भी अपनी स्पीड बडाई और आंटी ने मुझे कसकर पकड़ लिया और फिरसे एकबार पानी छोड़ दिया. उस दिन, मैं चार बार झड़ा और पूरी तरह से थक गया था. इस तरह मैंने आंटी को कई बार चोदा.

उस दिन, दोपहर १२ से ३ तक, आंटी और मेरी रासलीला चली. आंटी चार बार पानी छोड़ चुकी थी और मेरा तो बहुत बुरा हाल था. सेक्स होने के बाद, आंटी की चूत चाटी और बाद में होठ का रूस पी लिया. और आधा घंटा आंटी के पूरी बॉडी को चूसने और चाटने के बाद, मैं घर निकल गया और सो गया. फिर मैं सीधे शाम को ६ बजे उठा. आंटी ने मेरा पूरा पानी निकाल दिया था. लेकिन मैं भी कुछ कम नहीं था, आंटी को पूरा सैटइसफाई करके उनके घर से निकला था. इस तरह उस दिन, हमारी जबरदस्त चुदाई हुई थी और उसके बाद, मैं जब भी मौका मिलता था, तो आंटी की चूत मारता था और आंटी को पूरी तरह से सैटइसफाई करता था. आंटी को मेरे लंड से और मुझे उनकी चूत से प्यार हो गया था. फिर तो हमे जब भी मौका मिला, तो हमने अपनी चुदाईलीला का मज़ा लिया.
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