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Wednesday, 6 September 2017

जीजा ने चोदा मुझे बहाने से



हेल्लो मेरे प्यारे दोस्तों आज आपका मैं बहुत बहुत स्वागत करता हूँ इस हसीं शाम में जिसका नाम जीजा घुस गये चूत में | दोस्तों आज की ये कहानी हमारे घर की छोटी छोटी नोकझोंक जो एक जीजा और साली के बीच में होती है उस पर आधारित है और मुझे आपको ये बताते हुए बड़ा ही हर्ष महसूश हो रहा है कि जो हमारी पिछली कहानी थी उसकी आशातीत सफलता के बाद हम और हमारा ग्रुप आप के सामने लाया है “जीजा घुस गये चूत में” | दोस्तों हम और आप सब जानते हैं की सावन का महीना हमारे हिन्दू समाज में कितना पवित्र और कितना हसीं होता है | इसी महीने में आता है हम आरी बहन का प्यार भरा त्यौहार रक्षा बंधन और जब हमारी बहने अपने मायके जाती हैं और त्यौहार के बाद जब हमारे भाई उन्हें लेने जाते हैं तो वो जो मीठी सी तकरार उनके बीच में आ जाती है इस कहानी में इसका पूरा चित्रण किया गया हैं | तो दोस्तों आइये सुनते हैं इस कहानी को और हमारे किरदार जो निभा रहे हैं वो हैं प्रेमशंकर और लवली | इस कहानी को अपनी धुन और शब्दों से सजाया हैं मैंने याने की आपके अपने गुल्लू दुबे ने | आइये अब इस कहाँनी का मंचन शुरू किया जाए और आपको ले चलता हूँ एक जद्दुई महफ़िल में जिसका अघाज़ तो है पर इसका अंत नहीं है | और आप भी कभी नहीं चाहेंगे कि ऐसा कभी हो की जो ये मीठी सी लड़ाई है जिसका अपना मज़ा है वो कभी ख़तम हो | जो कुंवारे हैं वो शादी होने का इंतज़ार करे और जो शादीशुदा है वो मेरी बात समझ चुके होंगे | बड़ी ही अजीब सी कहानी है जो प्रेमशंकर और लवली को आपको सुनानी है और उनके मन में तो धीरज है नहीं तो चलिए मैं ही अपने शब्दों को विराम देता हूँ और उनको आपके सामने आने का निमत्रण देता हूँ | चलो भाई आजाओ अब में ले रहा हूँ विदा पर यूँ न करना कभी मुझको इन कहानियों से जुदा क्यूंकि यही मेरी कमाई और यही है मेरा खुदा | दोस्तों अब वो पकाऊ चला गया और हम दोनों जिला साली प्रेमशंकर और लवली आ गये हैं आपके मनोरंजन के लिए |



दोस्तों आप तो जानते हैं उत्तर प्रदेश का रिवाज़ है कि जब कभी जीजा आये तो उनकी खातिरदारी अच्छे से करनी पड़ती हैं | मैं तो लवली हूँ और मेरे जीजा प्रेमशंकर जिससे मेरी बहन का ब्याह हुआ है वो एक एकदम निकम्मा और किसी भी लड़की पे लट्टू हो जाने वाला आदमी है | पर मोहे कोई दिक्कत ना है क्यूंकि मोरी बहन से बड़ो प्यार करतो है | मैंने तो कभी सोचा नहीं कि मेरी मुम्मी जिस लड़के को मेरी दीदी के लिए लायेंगी वो इतना बड़ा प्रेम पुजारी निकलेगा और मुझ पे ही लट्टू हो जाएगा | पर अब बोलू भी तो क्या साली होती ही आधी घरवाली है | मुझे भी कोई आपत्ति नहीं थी इस बात पे और मैंने कभी भी उनको जबरदस्ती करते नहीं देखा | हाँ वो मजाक बहुत करते हैं सभी से | मेरी अम्म तो उनको देखके ही मुह बना लेटी है जैसे की सालो से दुश्मनी चल रही हो | तो दोस्तों जैसे ही जीता घर आये पिछले साल मेरी अम्मा ने सारे बर्तन चौके से बाहर कर दिए और मोहे कह दिया लवली अप तू ही संभाल मेरे दुश्मन को | मैंने कहा मम्मी ऐसा नहीं करते घर आये मेहमान के साथ ऐसा कोई करता है क्या | तो अम्मा बोली तेरा दोस्त है तू ही खिला दे इसको पुड़ी सब्जी | अब मैं तो दो चक्की में फस गयी थी मैं सोच रही थी क्या करूँ |



मैंने भी सोचा चल लवली देखा जाएगा जो होगा और उतने में जीजा की आवाज़ आई खाना लग गया | जैसे ही माँ ने सुना माँ चिल्लाने लगी हाँ दुश्मन खा ले मोहे खा ले तू | मैंने कहा माँ चुप हो जाओ और जीजा से हाँ आ जाओ | अब बड़ी दिक्कत हो गयी थी मेरे साथ एक तरफ माँ एक तरफ जीजा और एक तरफ उनका उल्लू दोस्त जो खाते ही जा रहा था | पर एक दिन की तो बात थी | अब था सवान और कोई जीजा अपनी साली को झूला न झुलाए ऐसा हो सही सकता | मैंने तुरंत कहा चलो जीजा मुझे झूला तो जुला दो और जीजा तो ठहरे मजाकिया तुरंत कह दिया चल लवली तोहे अपनी बाहों में झूला झुलौंगा | मैंने कहा ना जीजा मोहे तो असलो वाला झूलना है | अब खेत में गए और वो गधा दोस्त भी गया वो जब तक झूला बंद रहा था तब तक जीजा और मैं बात कर रहे थे दीदी के बारे में और जीजा कहने लगे मैं धन्य हो गया तेरी दीद मिल गयी मोहे | मैंने कहा इतनी अछि साली मिली है उसका कुछ नहीं मेरी दीदी में ऐसा क्या है जो मुझमे नहीं है |



अब जीजा ठहरे जीजा वो तो कुछ भी बोल देते है | उन्होंने कहा तेरे पास न वो नहीं है जो उसके पास है | मैंने कहा बताओ जीजा क्या नहीं है मेरे पास | उन्होंने कहा ना तेरे पास कतई नहीं है  वो जो रुकमनी के पास है | मैंने अच्छा ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है तो जीजा बोले लवली सुन ना पाएगी तू | मैंने कहा आप मोहे बता दो मैं सब सुन लुंगी | उन्होंने कहा पक्का सुन लेगी न | मैंने कहा हाँ जीजा अब बोल भी दो | उन्होंने कहा उसके उभार बड़े हैं और उसका बदन बिलकुल गठीला है और तू उसकी बराबरी कही से भी नहीं कर सकती | मुझे शर्म आने लगी मैंने कहा जीजा जे क्या बोल रहे हो | उन्होंने कहा तू ही सुनना चाहती थी तो ले सुनले | फिर मैंने कहा अच्छा चलो अब झूला बांध गया चलो और मोहे झुलाओ | उसका दोस्त चला गया वहां से और दूसरी लड्क्यों के साथ गप्पे मारने लग गया | जैसे जीजा वैसा दोस्त | अब जेजा मुझे धीरे धीरे झूला झुला रहे थे और मैंने कहा इतना अच्छा खाना खिलाया डीएम नहीं बची क्या अन्दर थोडा जोर से झुला दो |



जीजा ओले लवली डीएम तो इतनी है की तुझे मैं कही पे झुला सकता हूँ बस तैयार हो जा | मैंने कहा जीजा मैं सब समझती हूँ क्या बोल रहे हो आप मुझे बच्ची मत समझो मैंने भी अब सब कुछ जान लिया है | जीजा ने कहा अच्छा क्या जान लिया है ज़रा मोहे भी बता दे | तो मैंने कहा आप न मुझे चोदना कहते हो और मुझे ये बात पता है | तो जीजा ने कहा चल तो रुक्मनि के जैसी चूत  कहाँ है तेरी | मैंने बोला आपने कब देखि मेरी चूत | जीजा बोले तो दिखा न | फिर मैंने अपना लेहेंगा ऊपर करके जीजा को जैसे ही अपनी चूत दिखाई उन्होंने तुरंत अपना हाथ मेरी चूत पे लगा दिया | जीजा इतनी जोर से मेरी चूत को रगड़ रहे थे और मैं आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह कर रही थी | फिर उन्होंने मेरे पूरे कपडे उतार दिए और कहा चल आज खेत में ही तेरा मज़ा लेलेता हूँ | अब मैं तो पागल हो ही गयी थी और मैंने जीजा से कहा मेरे दूध पी के देखो दीदी से ज्यादा अच्छे हैं | जीजा दबा दबा के मेरे दूध पे रहे थे और मैं बस आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह कर रही थी |



उसके बाद उन्होंने अपनी जीभ से मेरी छूट को चाटने चालु किया और मेरे छूट के दाने से अब पानी बहने लगा था | मैंने कहा जीजा लंड पिलाओ न और आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह करते जा रही थी | जीजा ने अपना लंड निकाला और मेरे मुह में घुसा के पांच मिनट तक चोदा |



मैंने अब लंड का मज़ा भी ले लिया था और जीजा ने धीरे से मेरी चूत के लंड रखा और एक ही धक्के में पूरा अन्दर कर दिया | मैं आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आःह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह आह्ह आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह करती रही | फिर जीजा ने मुझे आधे घंटे तक बजाय और माल मेरे पेट पे गिरा दिया | अब मैं चुदती रहती हूँ उनसे |
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